कौटिळ आर्य चाणक्यजन्म ई स 283. मृतु 350अर्थशास्त्र,नीतीशास्त्र,और चाणक्य निती के रचयीताकौटिळ विष्णू गुप्त के घर मे जन्म,चाणक्य जी का पुर्ण शिक्षा तक्ष्शीला मे हुआ उस वक्त कि सबसे बडी शिक्षा संस्था.एक बार जब मगध पाटलिपुत्र के नंद वंश के राजा धनानन अपने राज्य बडा यज्ञ का आयोजन किया था उसी मे उन्होने ब्रह्म्भोज का आयोजन किया था,उसी आयोजन मे आर्य चाणक्य भी आये हुवे थे.राजा धनानन बहोत अयाश,क्रूर और कडवे वचन बोलनेवाला था.उसने चाणक्य का अपमान किया तथा उनकी वेशभूषा का उपहास किया.तब चाणक्य ने प्रतिज्ञा की जब तक नन्दवंश का नाश ना हो जाये तबतक चोटी नही बाधुगा.उन्होने ये प्रतिज्ञा एक साधारण युवक चंद्र गुप्त को लेकर पूरी की.उनकी नितियो को अपना कर चंद्रगुप्त अछा शासक बना.इसी नितियोके कुछ उदाहरण विचार आपके सामने जो हम अपने जिवके हार शेत्र हं अपना सके.1) कोई काम शुरु करणे से पहले स्वयम से तिन प्रश्न किजिये मै ये क्यो कर रहा हूँ,इसके परिणाम क्या हो सकते है और क्या मै सफल होऊगा ,और जब गह से सोचने पर इन प्रश्नो के संतोष जनक उतर मिल जाये ,तभी आगे बढे.2) व्यक्ती अकेले पैदा होता है और अकेले मर जाता है,और वो अपने अच्छे और बुरे कर्मो का फल खुद ही भुगतना है,और वह अकेले ही नर्क या स्वर्ग जाता है.3) भगवान मुर्तियो मे नही है,आपकी अनुभूती आपका ईश्वर है आत्मा मंदीर है.4)अगर साप जेहरिला ना भी हो तो उसे खुद को जहरिला दिखाना चाहिए .5) इस बात को व्यक्त मत होने दिजिये की आपणे क्या करने के लिए सोचा है,बुद्धिमानी से इसे रहस्य बणाये रखिये और इस काम को करने के लीये दृढ रहिये.6) शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है एक शिक्षित व्यक्ती हर जगह सम्मान पता है शिक्षा सौदर्य और यौवन को परास्त कर देती है.7)जैसे ही भय आपके करिब आये,उसपर आक्रमण कर उसे नष्ट कर दिजिये.8) किसी मूर्ख व्यक्ती के लिए किताबे उतनी ही उपयोगी है जितणी की एक अंधे व्यक्ती के लिए आईना.9) जब तक आपका शरीर स्वस्थ और नीयत्रण मे है और मृतु दुर है,अपनी आत्मा को बचाने की कोशिश किजिये,जब मृतु सरपर आजायेगी तब आप क्या कर पाएगे ?10)कोई व्यक्ती अपने कार्यो से महान होता है,अपने जन्म से नही.11) सर्प,राजा,शेर,डंक मारणे वाले ततैया,छोटे बच्चे,दूसरो के कुतो,और एक मूर्ख इन सातो को नीद से नही उठाना चाहिये.12) जिस प्रकार एक सुखे पेड को अगर आग लागा दी जाये तो वह पुरा जंगल जला देता है,उसी प्रकार एक पापी पुत्र पुरे परिवार को बर्बाद कर देता है.13) सबसे बडा गुरु मंत्र है कभी भी अपने रज दूसरो को मत बातए ये आपको बर्बाद कर देगा.14) पहले पाच सालो मे अपने बच्चे को बडे प्यार से रखिये अगले पाच साल उन्हे डाटडपट के रखिये जब वह सोलह साल का हो जाये तो उसके साथ एक मित्र की तरह व्यवहार करिये ,आपके वयस्क बच्चे ही आपके सबसे अच्छे मित्र है.15)फुलो की सुगंध केवळ वायू की दिशा मै फेलती है,लेकिन एक व्यक्ती की अच्छाई हर दिशा मै फेलती है.16) दुनिया की सबसे बडी शक्ती नौजवानी और औरत की सुंदरता है.17) हमे भूतकाळ के बारे मै पछ्तावा नही करणा चहिए ना ही भविष्य के बारे मे चितीत होना चहिए .विवेकवान व्यक्ती हमेशा वर्तमान मे जिते है.18)जब मेहनत करने के बाद भी सपने पुरे नही होते तो रास्ते बदलीए सिध्दांत नही,क्योकी पेड भी हमेशा पते बदलता है जड नही."गिता मे साफ शब्दो मे लिखा है,निराश मत होना कमजोर तेरा वक्त है तू नही.19) चरित्र अगर कपडो से तय होता तो कपडे की दुकान मंदिर कहलाई जाती.20) एक बात का हमेशा ध्यान रखो की समय और स्थिती कभी भी बदल सकती है,इसलीए कभी किसी का अपमान मत करो.21) बुढापे मे आपको रोटी आपकी औलाद नही आपके दिये हुए संस्कार ही खिलाएगे.22) आयु,कर्म,धन,विद्या,मृतु ये पाचो चीजे प्राणी के भाग्य मे तभी लिख दी जाती है,जब वह गर्भ मे ही होते है.23) सबसे बडा गुरु ठोकर हे खाते जाओगे सिखते जाओगे.24) चंदन कट जाने पर भी अपनी महक नही छोड़ता,हाथी बुढा होने परभी अपनी लिला नही छोड़ता,गना निचोडे जाने पर भी अपनी मिठास नही छोड़ता,उसी प्रकार उचे कुल मे पैदा हुआ व्यक्ती अपने उन्नत गुणो को नही छोड़ता ,भले ही उसे कितना भी गरिबी मे क्यो ना बसर करणा पडे.25) मुर्खो से तारिफ़ सुनने से बुध्दिमान की डाट सुनना ज्यादा बेहत्तर है.26) जिवन को उस तलाब की तरह बनओ जहा शेर भी पानी पिए और बकरी भी पानी पीए लेकीन सर झूकाके .27) जिंदगी को इतनी सस्ती भी मत बनओ की दो कौडी के लोग खेळ करकर चले जाए.28) बहुत मुश्किल है उस शक्स को गिराना जिस को चलना ठोकरो ने सिखया है.29) लोगो को उतनी ही ईज्जत दो जितणे मे अपनी कम ना हो,ज्यादा ईज्जत देने से कुछ लोग सर पर चढ जाते है.30) पिता द्वारा डाटा गया पुत्र,गुरु के द्वारा डाटा गया शिष्य तथा सुनार के द्वारा पिटा गया सोना ये सब आभूषण ही बनते है.31) जिवन मे तीन मंत्र आनंद मे वचन मत दिजिये,क्रोध मे उत्तर मत दिजिये,दुख मे निर्णय मत लिजिये.32) शब्दो मे जिम्मेदारी झलकनी चहिए आपको बहुत से लोग पढते है.33)अगर समझाने से लोग समझ जाते तो बासुरी बजाने वाला कभी महाभारत होने नही देता.34)सोच अच्छी होनी चाहिए क्योकी नजर का इलाज तो मुमकीण हे पर नजरिये का नही.35) फुंक मारकर दिये को बुझा सकते है,अगरबत्ती को नही क्योकी जो सुगंध फेलाता हे उसे कोई बुझा नही सकता.36) जो सही रास्ता न दिखाए वो दोस्ती दुश्मनि भी खतरनाक होती है.37) मन की सोच सुंदर हे तो सारा संसार सुंदर नजर आयेगा जिंदगी मे कभी अपने किसी हुनर पर घमंड मत करणा क्योकी पथ्यर जब पानी मे गिरता हे तो अपनो ही वजन से डूब जाता है.38) मृतु के बाद यही हे जीवन का कडवा सच (1) पत्नी मकान तक (2)समाज शमशान तक(3)पुत्र अग्नीदान तक(4)और केवळ आपके कर्म भगवान तक.39)व्यक्ती क्या हे यह महत्वपूर्ण नही हे ,व्यक्ती मे क्या हे यह महत्वपूर्ण है.40) अन्याय होते हुए देखकर भी हम चुप रहे ,तो गुणहगार तो हम भी होगे ना.41)मुसिबत मे अगर मदद मांगो तो सोचकर मांगना,क्योकी मुसिबत थोडी देर की होती हे और एहसान जिंदगी भर का.42)समंदर बडा होकर भी अपनी हद मे रहता हे इन्सान छोटा होकर भी अपनी हद भुल जाता हे.43)जिसके पास सत्य है उसकी आत्मा पवित्र रहती है.44)जो लोग कम सोचते हे और अधिक बोलते हे वही लोग अक्सर अनादर के पात्र बन जाते है.45)मतलबी लोग आपके साथ नही बल्की आपकी हैसियत के साथ होते है.46)व्यक्ती अपने गुणो से उपर उठता हे,उचे स्थान पर बैठने से उचा नही हो जाता है.47)आॅख से अंधे को दुनिया नही दिखती ,काम के अंधे को विवेक नही दिखाता ,मद के अंधे को अपने से श्रेष्ट नही दिखता और स्वार्थी को काही भी दोष नही दिखता.48)बात इतनी मधुर रखो की कभी वापस लेणी पडे तो खुद को कडवी न लगे.49)जिस मे नुकसान सहने की ताकद हो वही मुनफा कमा सकता है,फिर चाहे वो करोबार हो या रिश्ते या कोई युध्द.50)कदम,कसम और कलम हमेशा सोच समझकर ही उठाना चहिए.51)इस बात को व्यक्त मत होने दिजिये की अपने क्या करने के लिए सोचा हे,बुध्दिमानी से इसे रहस्य बनाये रखिये और इस काम को करने के लिए दृढ रहिये.52)शिक्षक कभी साधारण नही होता प्रलय और निर्मान उस्की गोद मे पलते है.53)जब भी अचानक आपके प्रति किसी का व्यवहार बदल जाए तो समझ जाओ वह आपसे कुछ चाहता है.54)मन्जिल कितनी भी दुर क्यो न हो,पर हिम्मत मत हारिये,क्योकी पहाड से निकली नदी ने कभी किसिसे समुद्र का रास्ता नही पुछा.55)कोई व्यक्ती अपने कार्यो से महान होता है अपने जन्म से नही.56)खुद को अगर जिंन्दा समझते हो तो गलत का विरोध करना सिखे क्योकी लहर के साथ लाशे बहा करती है तैराक नही.57)हर मित्रता के पिछे कोई ना कोई स्वार्थ होता है,एसी कोई मित्रता नही जिसमे स्वार्थ नाहो,यह कडवा सच है.58)श्रेष्ठता जन्म से नही आती गुणो के कारण इसका निर्णय होता है,दुध ,दही,छाछ,घी सब एक ही कूळ के होते हुए भी सब के मुल्य अलग अलग होते है.59)किसी भी मनुष्य की वर्तमान स्तिथी देख के उसके भविष्य का उपहास मत उडाओ क्योकी समय मे इतनी शक्ती है की वो एक मामुली से कोयले को भी हिरा बना देता है.60)माता पिता की नसिहत सबको बुरी लगती है पर माता पिता की वसिहत सबको अच्छी लगती है.61)मधुर वचन बोलना दान के समान है,मधुर बोलने मै कैसी गरिबी.62)अपने कर्म पर विश्वास रखिये रशियो पर नही,राशी तो राम और रावण की भी एक ही थी,लेकीन नियती ने उन्हे फळ उनके कर्म अनुसार दीया.63)जो बुध्दिहीन हे उनके लिए शास्र वेद आदी भी कोई कल्याण नही कर सकते.64)अपनी गलती को स्वीकारणा झाडू लगाने के समान हे,जो थोडा अजिब लगता है लेकीन स्वयम को चमकदार और साफ कर देती है.65)जो व्यक्ती स्पष्ट,साफ,सिधी बात करणा है उसकी वाणी तिव्र एक कठोर होती जरुर है लेकिन ऐसा व्यक्ती कभी किसी को धोखा नही देता.66) जिसे किसी के प्रति प्रेम होता है उसे उसी से भय भी होता है.67)जीवन मे पछ्तावा करना छोडो,कुछ ऐसा करो की तुम्हे छोड देनेवाले पछ्ताए.68)इतिहास इस बात का साक्षी है की जितना नुकसान हमे दर्जनो की दर्जंता से नही हुआ उससे ज्यादा सज्जनो की निष्क्रीयता से हुआ है.69)जो बीत गया,सो बित गया,यदी हमसे कोई गलत काम हो गया हे,तो उसकी चिंता न करते हुए वर्तमान को सुधारकर भविष्य को सवारना चाहिये.70)दिखावा और झुठ बोलकर व्यवहार बनाने से अच्छा हे सच बोलकर दुश्मन बना लो आपसे साथ कभी विश्वासघात नही होगा.71)जीवन मे आगे बढना हे तो बेहरे हो जाओ.क्योकी अधिकतर लोगो की बाते मनोबल गिराने वाली होती है72)संसार जरुरत के नियम पर चलता हे,सर्दियो मे जिस सुरज का इंतजार होता हे,उसी सुरज का गर्मियोमे तिरस्कार भी होता है."आप की किमत तब होगी जब आपकी जरुरत होगी".73)आमदनी पर्याप्त ना हो तो खर्चो पर नियंत्रण रखिये.जानकारी पर्याप्त ना हो तो शब्दो पर नियंत्रण रखिये.74)सबसे बडा गुरु ठोकर हे खाते जाओगे सिखते जाओगे.75)दुष्ट के साथ दृष्टता का ही व्यवहार करना चहिए इसमे कोई बुराई नही है.76) किसी के बुरे पर वक्त पर हसने की गलती मत करना ये वक्त हे चेहरे याद राखता है.77)बार बार आसू साफ करने की बजाय अपनी जिंदगी से उसको ही साफ करदो जिसकी वजह से आपकी आखो के आसू आते है.78)मूर्ख व्यक्ती को पशू समझकर त्याग देना चहिए.79)साथ रहकर जो छल करे उससे बडा कोई शत्रु नही हो सकता और जो हमारे मुह पर हमारी बुराईया बता दे उससे बडा कोई मित्र नही हो सकता80)झुको केवल उतना ही जितना सही हो बेवजह झुकना केवल दूसरो के अहम को बढावा देता है.81)ईश्वर चित्र मे नही अपनी चरित्र मे बसना हे अपनी आत्मा को मन्दीर बनाओ.82)कभी भी उससे मित्रता नही करे जो आपसे कम या ज्यादा प्रतिष्टा हो ऐसी मित्रता कभी आपको खुशी नही देगी.83)मैदान मे हारा हुआ फिर से जित सकता हे परंतू मन से हारा हुआ कभी जित नही सकता आपका आत्मविश्वास ही आपकी सर्वश्रेष्ट पुंजी है.84)छोटा हो या बडा जो भी काम करना चाहो उसे अपनी पूरी शक्ती लगाकर करे यह गुन हमे शेर से सिखना चहिए.85)आलसी का वर्तमान और भविष्य नही होता.86)आचरणं से व्यक्ती के कूळ का परिचय मिलता है.87)जैसे एक बछडा हजारो गायो के झुंड मे अपनी मा के पिछे चलता हे,उसी प्रकार आदमी के अच्छे और बुरे कर्म ऊसके पिछे चलते है.88)व्यक्ती अपने गुणो से उपर उठता है उचेस्तान पर बैठ जाने से ही उच्च नही हो जाता.89)छिपकर मैथून करना समय-समय पर संग्रह करना सावधान रहना किसी पर विश्वास न करना और आवाज देकर औरो को भी इकठा कर लेना ये पांच गुन कौवे से सिखे.90)किसी मूर्ख व्यक्ती के लिए किताबे उतनी ही उपयोगी है जितनी की एक अंधे व्यक्ती के लिए आईना.91)कोयल तब तक मौन रहती है जबतक उसकी मधुर वाणी नही फुट पडती जब भी बोलो मधुर बोलो कडवा बोलने से चुप रहना ही बेहतर है.92)कभी किसी के सामने अपनी सफाई पेश मत करना क्योकी जिसपर विश्वास हे उसे जरुरत नही और जिसे तुम पर विश्वास नही वो मानेगा ही नही.93)दान दरिद्रता को नष्ट कर देता है.94)न कोई किसी का मित्र हे और नही शत्रु,कार्यवश ही लोग मित्र और शत्रु बनते है.95)जन्म देनेवाला ,संस्कार करने वाला,विद्या देनेवाला,अन्नदाता तथा भय से रक्षा करनेवाला,ये पाच प्रकार के पिता होते है.96)जिस गुरु के पास आध्यात्मिक ज्ञान नही हे उसे त्याग देना चहिए.97)साप को दुध पिलाने से विष ही बढता हे न की अमृत.98)वासना के समान दुष्कर कोई रोग नही,मोह के समान कोई शत्रु नही,क्रोध के समान अग्नी नही, स्वरुप ज्ञान के समान कोई बोध नही99)व्यक्ती को अपनी ही पत्नी से संतोष कर लेना चाहिए चाहे वह रुपवाती हो अथवा साधारण वह सुशिक्षित हो अथवा निरक्षर उसकी पत्नी हे याही बडी बात है.100)5 बाते माता के गर्भ मे ही निश्चीत हो जाती हे,(1)व्यक्ती कितने साल जियेगा(2)वह किस प्रकार का काम कारेगा(3)उसके पास कितनी संपत्ती होगी(4)वह कितनी शिक्षा ग्रहण करेगा (5)उसकी मृतु कब होगी.101)शत्रु चाहे कितना बलवान हो यदी अनेक छोटे-छोटे व्यक्ती भी मिळ्कर उसका सामना करे तो उसे हरा देते हे,छोटे-छोटे तिन्के से बना हुआ छप्पर मुसळधार बरसती हुई वर्षा को भी रोक देता हे,वास्तव मे एकता मे बडी भारी शक्ती है.102)जीवन मे तीन मंत्र हमेशा याद रखो आनंद मे वचन मत दिजिये क्रोध मे उतर मत दिजिये दुख मे निर्णय मत लिजिये.103)ॠण,शत्रु,और रोग को समाप्त कर देना चाहिए.104)इन बातो को बार बार गौर करो सही समय,सही मित्र,सही ठीकाना,पैसे कमाने के सही साधन,पैसे खर्च करने के सही तरिके,आपके उर्जा स्रोत.105)शत्रु की दुर्बलता जनणे तक उसे आपण मित्र बनाए रखे.106)समय पर जागना,लडना,भाईयो को भगा देना और उनका हिस्सा स्वयं झपटकर खा जाना ये चार बाते मुर्गे से सिखे.107)बुध्दी से पैसा कमया जा सकता हे ना की पैसे से बुध्दी हासिल की जा सकती है.108)विपती के समय मित्र की परिक्षा होती है.109)जो तुम्हारी बात सुनते समय इधर उधर देखे उसपर कभी विश्वास न करो.110)जिस देश मे सम्मान न हो,जहा कोई अजिविका न मिले,जहा अपना कोई भाई-बंधू न रहता हो,जहा विद्या अध्यन सम्भव न हो,ऐसे स्तान पर नही रहना चाहिए.111)बडा बनो लेकिन उसके सामने नही जिसने तुम्हे बडा किया है.112)दुष्ट पत्नी,शत्रु मित्र उत्तर देने वाला सेवक तथा सप वाले घर मे निवास करना,ये मृतु के कारण हे इसमे सन्देह नही करना चाहिए.113)जो निश्चीत को छोडकर अनिश्चित का सहारा लेता हे उसका निश्चीत भी नष्ट हो जाता हे,अनिश्चित तो स्वयम नष्ट होता ही है.114)व्यक्ती संन्सार मे अकेला ही जन्म लेता हे,अकेला ही मृत्यू को प्राप्त करता है,अकेला ही शुभ- अशुभ कर्मो का भोग करता हे,अकेला नरक मे पडता हे तथा अकेला ही पारमगाती को भी प्राप्त करता है.115)जिस मनुष्य को धर्म,काम,भोग,मोक्ष मे से एक भी वस्तू नही मिल पाती उसका जन्म केवळ मरने के लिए ही होता है.116)बादल के समान कोई जल नही होता,अपने बळ के समान कोई बळ नही होता,आखो के समान कोई ज्योती नही होती और अन्न के समान कोई प्रिय वस्तू नही होती.117)जो शक्ती न होते हुए भी मन से हार नही मानता हे,उस को दुनिया की कोई ताकद परास्त नही कर सकती.118)विप्पती के समय के लिए धन की रक्षा करणी चाहिए,धन से अधिक रक्षा पत्नी की करनी चाहिए,किन्तू अत्मसमान की रक्षा का प्रश्न समुख आणेपर धन और पत्नी का बलिदान भी करना पडे तो कर देना चाहिए.