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अब एक बात और आप लोगों से कहूंगा अब कुछ लोग कहते हैं कि विकास हुआ था और हुआ है मेरे भाई कहां है और कब हुआ अगर हुआ तो हम लोग क्यों अपना घर बार छोड़कर अपनों को छोड़कर रिश्तेदारी छोड़कर अपने भारतीय हार अपनी देवभूमि की संस्कृति से दूर पिरान जगहों पर अब हमारे लिए तो विरान जगह है क्यों है क्योंकि ना किसी से मिल सकते हैं ना किसी के साथ आना जाना और कितनी शर्म की बात है अब आप लोग कहते हो कि विकास हुआ है तो मेरे भाई तो हम अपना गांव घर छोड़कर क्यों गए हैं अपना भविष्य के लिए दौड़ रहे हैं भटक रहे हैं ताकि हम लोगों के घर बाहर चल सके तो तुम लोग क्यों अपना क्षेत्र छोड़कर अपना एक स्टेट छोड़कर क्यों दर-दर भटक रहे हो अगर बेकार हुआ था तो हमारे बच्चों को स्कूल में शिक्षा ठीक ढंग से नहीं मिलती कहां से शिक्षा प्राप्त होगी कैसे भविष्य का सुधार होगा अगर तुम लोग एक अपने रास्ते के लिए अगर सरकार छोड़ रहे हो या यह सोच रहे हो कि नहीं हमारा एक लैट्रिन बाथरूम बना देगी तो हम लोग सब इसी को वोट देंगे तो तुम लोग क्यों इस से बाहर निकल कर थोड़ा बड़ा सोचने की कोशिश करते क्यों नहीं बड़ा सोचते ताकि आने वाले बच्चों के लिए कुछ करके जाएं क्या वह भी हमारी तरह दर-दर भट्ट करेंगे क्या चाहिए मेरे भाई स्वास्थ्य शिक्षा और रोजगार इन तीनों में से अगर एक भी चीज तुम्हें मिली है तो बताओ अगर मिली है तो तुम लोग यहां हम लोग क्यों अपना क्षेत्र अपना गांव छोड़कर भटक रहे हैं अपने घर जाने के लिए या ड्यूटी पूरी करने के बाद भी हम लोग छुट्टी जब टाइम हो जाता है छुट्टी का तो दूसरे से इजाजत लेनी पड़ती है कि मैं अब घर जा रहा हूं क्या हम लोग यहीं तक सीमित रह गए हैं कब तक चलेगा यह सब आज तुम लोग 4 महीने घर में क्या रहे तो तुम्हें विकास या काम नजर आ रहा है इससे पहले क्या तुम लोग भूल गए थे अपने गांव अपना घर अपना एरिया क्यों क्यों भूल गए थे मेरे भाई आज तक तुम लोगों को याद नहीं आया क्या तुम लोग सिर्फ वोट देने घर जाते थे उसके बाद तुम लोग तो भूल जाते थे ना दूसरी जगहों पर नौकरी करने चले जाते थे और 6 महीने साल भर के बाद घर जाना 10 से 15 दिन गांव में रहना फिर शहर की तरफ दौड़ जाना हमारी लाइफ तो यूं ही खत्म होगी भागा दौड़ी में कहां से देखना था हमें विकास कहां से होना था विकास कौन करा था काम क्योंकि कराने वाले तो दर-दर की ठोकरें दूसरे शहरों में खा रहे थे गांव के बुजुर्गों को हमारे बुजुर्गों को भविष्य का पता होता तो हम लोग दूसरे शहरों में भटक नहीं रहे होते कम से कम अपने स्टेट में तो रहते सुबह ड्यूटी जाकर शाम को घर नहीं भी जाते तो कम से कम हफ्ते 15 दिन में तो जाते क्या मिला हमें क्यों आंखें बंद है तुम लोगों की क्यों नहीं करवाते काम क्यों सिस्टम बदलने की कोशिश नहीं करते कब तक घर बदलते रहोगे अब तक सरकार बदलते रहोगे मेरे भाई उसी घर को ठीक करने की जरूरत है कब तक भागते रहेंगे एक बार सोचना जरूर पढ़ना जरूर